योगी आदित्यनाथ ने दो टूक कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पूरा सम्मान होगा और माहौल बिगाड़ने और अराजकता फैलाने की छूट किसी को नहीं मिलेगी।

राम मंदिर पर आने वाले फैसले के मद्देनजर कानून-व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त करने के लिए सरकार ने कमर कस ली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो टूक कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पूरा सम्मान होगा और माहौल बिगाड़ने और अराजकता फैलाने की छूट किसी को नहीं मिलेगी। ऐसे तत्वों तथा सोशल मीडिया के भड़काऊ पोस्ट पर नजर रहेगीमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलों के डीएम, एसएसपी-एसपी और वरिष्ठ अधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये दिशा निर्देश दिएमुख्यमंत्री के सरकारी आवास पांच कालिदास से संचालित इस कॉन्फ्रेंसिंग में मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी, डीजीपी ओपी सिंह, अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी, सचिव मुख्यमंत्री संजय प्रसाद समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थेमुख्यमंत्री ने डीएम-एसपी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की। कहा, छोटी से छोटी घटनाओं का संज्ञान लेकर त्वरित कार्रवाई करें। हर जिले में 24 घंटे कंट्रोल रूम संचालित करने और सूचनाओं पर एक्शन के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को जनता, नेताओं और धर्म गुरुओं के साथ लगातार संवाद बनाए रखने के निर्देश दिए। योगी ने थानावार शांति समितियों की बैठक करने पर जोर दिया और कहा कि आपातकालीन सहायता डायल 112 पर आने वाली हर सूचना का कम से कम समय में संज्ञान लेकर त्वरित कार्रवाई करें। उन्होंने संसाधन व्यवस्थित करने और बॉर्डर पर सघन जांच की भी हिदायत दीबैठक की शुरुआत में ही डीजीपी ओपी सिंह ने अब तक की सभी तैयारियों का विवरण दिया और कहा कि मुख्यमंत्री की हमेशा फुट पेट्रोलिंग की हिदायत रही है। अब तक फुट पेट्रोलिंग में 1753 लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है।


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बीबीसी की हेडलाइन लंदन के मीडिया संस्थान बीबीसी ने लिखा कि देश के एक अरब से ज्यादा लोगों ने रविवार को 14 घंटे के लिए जनता कर्फ्यू का पालन किया। प्रधानमंत्री मोदी की अपील पर कोरोना वायरस से लड़ाने में सभी लोगों ने सहयोग किया।
दिल्ली हाईकोर्ट ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली हिंसा के आरोप में गिरफ्तार आरोपी शादाब आलम की जमानत याचिका खारिज कर दी। पीठ ने कहा कि मामले की जांच अहम पड़ाव में है और आरोपी को घटनास्थल से पकड़ा गया है, इसलिए जमानत नहीं दी जा सकती।न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता के समक्ष जमानत याचिका में दलील दी गई कि शादाब आलम के खिलाफ कोई और मामला दर्ज नहीं है और न ही वह किसी अन्य मामले में लिप्त है। उत्तर पूर्वी जिले में 22 से 24 फरवरी के दौरान हुई हिंसा के दौरान 24 फरवरी को शादाब को पुलिस ने पीसीआर कॉल पर गिरफ्तार किया था।
शादाब के वकील ने दलील दी कि पुलिस ने शादाब के पास से ऐसी कोई भी वस्तु व्यक्तिगत रूप से उसके पास से बरामद नहीं की, जिससे यह साबित हो सके वह दंगों में शामिल था। इसके साथ ही उसने दावा किया कि इस मामले में अभी तक पुलिस के पास कोई ठोस सुबूत नहीं है।