ऐसी मार-पीट, खींच-तान बड़ी देर तक होती रही। एक तरफ मीरावती के जेठ और देवर का तर्क था कि मग्घे की मृत्यु मीरावती की लापरवाही एवं अपलक्ष्य से हुई है इसीलिए उसे वहां से चले जाना चाहिए दूसरी तरफ रोतीफफकती मीरावती थी जो पति-वियोग से आक्रान्त थी, उसके चार अबोध बच्चे थे, वह तर्क विहीन थी। उसके साथ सिर्फ उसके आंसू, सिसकी और दुहाइयां थीअगल-बगल के लोग परेशान थे कि कहीं थाना-पुलिस न हो जाए। इस खुसर पुसर से आजिज होकर गांव के चौकीदार ने प्रधान को बताया कि अगर फौरन दाह-संस्कार नहीं कराया गया तो मजबूरन उसे थाने को खबर करनी पड़ेगी और एक बार अगर थाने को खबर दे दी गई तो कई लोग कानून के लपेटे में आ सकते हैं। यह बात प्रधान की समझ में तुरंत आ गई कि अगर कहीं बात बढ़ गई तो उसने पिछले दो साल से मनरेगा की जो फर्जी मजदूरी मृतक के नाम पर हड़पी है, उसकी भी पोल खुल सकती है।

ऐसी मार-पीट, खींच-तान बड़ी देर तक होती रही। एक तरफ मीरावती के जेठ और देवर का तर्क था कि मग्घे की मृत्यु मीरावती की लापरवाही एवं अपलक्ष्य से हुई है इसीलिए उसे वहां से चले जाना चाहिए दूसरी तरफ रोतीफफकती मीरावती थी जो पति-वियोग से आक्रान्त थी, उसके चार अबोध बच्चे थे, वह तर्क विहीन थी। उसके साथ सिर्फ उसके आंसू, सिसकी और दुहाइयां थीअगल-बगल के लोग परेशान थे कि कहीं थाना-पुलिस न हो जाए। इस खुसर पुसर से आजिज होकर गांव के चौकीदार ने प्रधान को बताया कि अगर फौरन दाह-संस्कार नहीं कराया गया तो मजबूरन उसे थाने को खबर करनी पड़ेगी और एक बार अगर थाने को खबर दे दी गई तो कई लोग कानून के लपेटे में आ सकते हैं। यह बात प्रधान की समझ में तुरंत आ गई कि अगर कहीं बात बढ़ गई तो उसने पिछले दो साल से मनरेगा की जो फर्जी मजदूरी मृतक के नाम पर हड़पी है, उसकी भी पोल खुल सकती है।


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देश के प्रतिष्ठित आईआईटी संस्थानों के कैंपस में बीते 5 सालों में 50 छात्रों की मौत हुई है। इनमें से अधिकतर छात्रों ने सूसाइड किया था
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बीबीसी की हेडलाइन लंदन के मीडिया संस्थान बीबीसी ने लिखा कि देश के एक अरब से ज्यादा लोगों ने रविवार को 14 घंटे के लिए जनता कर्फ्यू का पालन किया। प्रधानमंत्री मोदी की अपील पर कोरोना वायरस से लड़ाने में सभी लोगों ने सहयोग किया।
दिल्ली हाईकोर्ट ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली हिंसा के आरोप में गिरफ्तार आरोपी शादाब आलम की जमानत याचिका खारिज कर दी। पीठ ने कहा कि मामले की जांच अहम पड़ाव में है और आरोपी को घटनास्थल से पकड़ा गया है, इसलिए जमानत नहीं दी जा सकती।न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता के समक्ष जमानत याचिका में दलील दी गई कि शादाब आलम के खिलाफ कोई और मामला दर्ज नहीं है और न ही वह किसी अन्य मामले में लिप्त है। उत्तर पूर्वी जिले में 22 से 24 फरवरी के दौरान हुई हिंसा के दौरान 24 फरवरी को शादाब को पुलिस ने पीसीआर कॉल पर गिरफ्तार किया था।
शादाब के वकील ने दलील दी कि पुलिस ने शादाब के पास से ऐसी कोई भी वस्तु व्यक्तिगत रूप से उसके पास से बरामद नहीं की, जिससे यह साबित हो सके वह दंगों में शामिल था। इसके साथ ही उसने दावा किया कि इस मामले में अभी तक पुलिस के पास कोई ठोस सुबूत नहीं है।