खामखां की सांसत से बचने के लिए प्रधान ने अपने पंच बुलाए, मृतक के घर पहुँचकर सभी को डपटा। प्रधान ने पहले तो घुड़कियां दीं फिर न्याय की बात की। क्योंकि पिछले दो तीन सालों की मग्घे की मजदूरी दस हजार से भी ज्यादा निकल रही थी। बैठे-बिठाए मजदूरी का कमीशन तय था, साठ फीसदी प्रधान का, बीस फीसदी बैंक वालों का, दस फीसदी सरकारी बाबुओं का और दस फीसदी उसका जिसके नाम का जॉब कार्ड हो, यानी मजदूरी उठाने वाले मग्घे का।

खामखां की सांसत से बचने के लिए प्रधान ने अपने पंच बुलाए, मृतक के घर पहुँचकर सभी को डपटा। प्रधान ने पहले तो घुड़कियां दीं फिर न्याय की बात की। क्योंकि पिछले दो तीन सालों की मग्घे की मजदूरी दस हजार से भी ज्यादा निकल रही थी। बैठे-बिठाए मजदूरी का कमीशन तय था, साठ फीसदी प्रधान का, बीस फीसदी बैंक वालों का, दस फीसदी सरकारी बाबुओं का और दस फीसदी उसका जिसके नाम का जॉब कार्ड हो, यानी मजदूरी उठाने वाले मग्घे का।


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बीबीसी की हेडलाइन लंदन के मीडिया संस्थान बीबीसी ने लिखा कि देश के एक अरब से ज्यादा लोगों ने रविवार को 14 घंटे के लिए जनता कर्फ्यू का पालन किया। प्रधानमंत्री मोदी की अपील पर कोरोना वायरस से लड़ाने में सभी लोगों ने सहयोग किया।
दिल्ली हाईकोर्ट ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली हिंसा के आरोप में गिरफ्तार आरोपी शादाब आलम की जमानत याचिका खारिज कर दी। पीठ ने कहा कि मामले की जांच अहम पड़ाव में है और आरोपी को घटनास्थल से पकड़ा गया है, इसलिए जमानत नहीं दी जा सकती।न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता के समक्ष जमानत याचिका में दलील दी गई कि शादाब आलम के खिलाफ कोई और मामला दर्ज नहीं है और न ही वह किसी अन्य मामले में लिप्त है। उत्तर पूर्वी जिले में 22 से 24 फरवरी के दौरान हुई हिंसा के दौरान 24 फरवरी को शादाब को पुलिस ने पीसीआर कॉल पर गिरफ्तार किया था।
शादाब के वकील ने दलील दी कि पुलिस ने शादाब के पास से ऐसी कोई भी वस्तु व्यक्तिगत रूप से उसके पास से बरामद नहीं की, जिससे यह साबित हो सके वह दंगों में शामिल था। इसके साथ ही उसने दावा किया कि इस मामले में अभी तक पुलिस के पास कोई ठोस सुबूत नहीं है।